Tuesday, June 7, 2011

आज फिर वाही भागमभाग थी ऐसी भागम भाग का फायदा उठाते उए एक वृद्ध महिला अपना भानुमती का पिटारा बिना स्कैन करवाए लोगो के बीच से जल्दी जल्दी निकली जा रही थी ,सायद टाइम कम था उनके पास .  माता जी पर कही जल्दी  पहुचने की धुन में थी. पर हमारे देश के वीर जवान ने देख लिया और कहा , माता जी आपके बैग मै क्या है, माताजी झल्लाते  हुए बोली - ले, कर ले चेक' कुछ भी नही है.  मै बम नही लिए हुए हूँ . ले देख ले .......यह द्रश्य जहाँ हाश्य पैदा करता है वही कुछ और भी इशारा करता है...हमारे बुजुर्गवार नई टेक्नोलोजी तो तारतम्य बैठाते है. पर ख़ुशी होती है की बे भी युवाओ के साथ कदम ताल मिलते है...
आप का क्या कहना है ?

Sunday, June 5, 2011

मेट्रो ..रफ़्तार जिंदगी की...

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आज मुझे दिल्ली में आए 2 वर्ष  हो चुके। कुछ रोजी-रोटी की तलाष या अच्छे कॅरियर का दबाव। यहां हम भागते जा रहे है। कभी बस, कभी आटो, या फिर  दिल्ली की जीवन रेखा कही जानी वाली मेट्रो । फिर  भी इस भागमभाग में मुस्कराने के पल बेषुमार मिल ही जाते है। मेरा औसतन डेढ़ से दो घंटा मेट्रो  में बीतता है। रोज ही अजनबी चेहरे देखता और मुस्कराता आता जाता हूं। इस रोजी की यात्रा में मुझे कुछ षरारती, कुछ सहयोगी या फिर  कुछ अडि़यल लोग यहां मिलते रहते है। मेट्रो  में बिताये इन्हीं पलों, मिनटों, घंटों को मैं आप सभी के साथ बाटना चाहता हूं। साथ ही अपेक्षा करूंगा कि आप भी मेरे साथ अपने इसी प्रकार के अनुभवों को सभी के साथ बांटे, चाहे जब...मेरे ब्लॉग मेट्रो ..रफ़्तार जिंदगी की...